LIVE UPDATE
गैजेट्सझमाझम खबरेंट्रेंडिंगदुनियादेशप्रदेशराजनीतीरायपुर

DEO की कुर्सी पर बड़ा एक्शन! 4.51 करोड़ की खरीदी में अनियमितताओं के आरोपों के बीच मनीराम यादव हटे

4.51 करोड़ की खरीदी पर उठे सवाल, प्रभारी DEO मनीराम यादव हटाए गए

गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बीच स्कूल शिक्षा विभाग का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, नरेंद्र कुमार निरापुरे को मिली बलरामपुर-रामानुजगंज DEO की जिम्मेदारी

ये खबर भी पढ़ें…
सेवा संकल्प अभियान के तहत भदौरा में लगा सेवा सेतु शिविर, ग्रामीणों को योजनाओं की दी जानकारी
सेवा संकल्प अभियान के तहत भदौरा में लगा सेवा सेतु शिविर, ग्रामीणों को योजनाओं की दी जानकारी
September 29, 2026
सेवा संकल्प अभियान के तहत भदौरा में लगा सेवा सेतु शिविर, ग्रामीणों को योजनाओं की दी जानकारी राशनकार्ड, ई-केवाईसी, आधार...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

रायपुर, 28 सितंबर 2026। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) मनीराम यादव को आखिरकार पद से हटा दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर ने 28 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर उनका स्थानांतरण कर दिया। मनीराम यादव को प्रभारी DEO के पद से हटाकर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसा, विकासखंड अंबिकापुर, जिला सरगुजा में पदस्थ किया गया है।

वहीं, शासकीय हाई स्कूल कोराचा, विकासखंड मानपुर, जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के प्राचार्य नरेंद्र कुमार निरापुरे को बलरामपुर-रामानुजगंज का नया प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है। दोनों पदस्थापन तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 8,720 रिक्तियां, जीपीएम के युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर
राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 8,720 रिक्तियां, जीपीएम के युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर
September 29, 2026
राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 8,720 रिक्तियां, जीपीएम के युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर 7 एवं 8 अक्टूबर...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

4.51 करोड़ की खरीदी ने बढ़ाई मुश्किलें

मनीराम यादव को हटाए जाने का आदेश ऐसे समय आया है, जब बलरामपुर शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये की खरीदी को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप और जांच रिपोर्ट चर्चा में हैं। प्राप्त जांच संबंधी जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में शिक्षा विभाग को विभिन्न योजनाओं के लिए करोड़ों रुपये का बजट मिला था। आरोप है कि फर्नीचर, स्वच्छता सामग्री, खेल एवं व्यायाम सामग्री, स्टेशनरी, विज्ञान सामग्री सहित विभिन्न मदों में लगभग 4.51 करोड़ रुपये की खरीदी में नियमों का पालन नहीं किया गया।

ये खबर भी पढ़ें…
बिलासपुर : सरकारी काम छोड़ ‘हर्बल प्रोडक्ट’ की प्रचार में मस्त पटवारी प्रियंका बैगा, 22 किमी दूर से चल रही ‘ड्यूटी’,
बिलासपुर : सरकारी काम छोड़ ‘हर्बल प्रोडक्ट’ की प्रचार में मस्त पटवारी प्रियंका बैगा, 22 किमी दूर से चल रही ‘ड्यूटी’,
September 29, 2026
बिलासपुर : सरकारी काम छोड़ 'हर्बल प्रोडक्ट' की प्रचार में मस्त पटवारी प्रियंका बैगा, 22 किमी दूर से चल रही...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

जांच में कथित तौर पर जिला स्तरीय क्रय समिति के गठन, सामग्री के भौतिक सत्यापन, स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि और खरीदी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।

न समिति बनी, न स्टॉक का हिसाब?

जांच में सामने आए बिंदुओं के अनुसार करोड़ों रुपये की खरीदी के बावजूद जिला स्तरीय क्रय समिति के गठन को लेकर सवाल उठे हैं। वहीं कई सामग्रियों की स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की सरकारी राशि से खरीदी गई सामग्री आखिर गई कहां? किस स्कूल को कितनी सामग्री मिली? उसका भौतिक सत्यापन किसने किया? और भुगतान से पहले सामग्री की वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित क्यों नहीं की गई?

4025 साइकिलों के भुगतान पर भी सवाल

मामले में 4025 साइकिलों के लिए करीब 1.62 करोड़ रुपये के भुगतान का उल्लेख सामने आया है। जांच के दौरान इनके संबंध में स्टॉक एंट्री और चालान उपलब्ध होने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।इसी तरह लगभग 42 लाख रुपये की विज्ञान किट खरीदी के संबंध में भी सत्यापन और स्टॉक दर्ज किए जाने को लेकर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं।

50-50 हजार के बिलों से टेंडर प्रक्रिया से बचने का आरोप

जांच में यह भी आरोप सामने आया कि टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए भुगतान को छोटे-छोटे बिलों में विभाजित किया गया। कुछ मामलों में 50-50 हजार रुपये के बिलों के जरिए भुगतान किए जाने की बात कही गई है। स्टेशनरी के नाम पर करीब 11.20 लाख रुपये के भुगतान को लेकर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि इसमें न तो पर्याप्त कोटेशन प्रक्रिया अपनाई गई और न ही सामग्री की स्टॉक एंट्री का स्पष्ट रिकॉर्ड मिला।

इसके अलावा परीक्षा मुद्रण सामग्री के लिए रांची की एक फर्म को करीब 17.96 लाख रुपये के भुगतान का भी जांच में उल्लेख बताया गया है।

कैशबुक में कटिंग और ओवरराइटिंग पर भी सवाल

जांच के दौरान कैशबुक में कथित तौर पर कटिंग, ओवरराइटिंग और अप्रमाणित सुधार मिलने की बात सामने आई है। वहीं कार्यालय के कुछ कर्मचारियों द्वारा खरीदी गई सामग्रियों की प्राप्ति और उपलब्धता के संबंध में जानकारी नहीं होने की बात भी जांच में दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अगर जांच में सामने आए ये बिंदु सही पाए जाते हैं, तो यह केवल कागजी प्रक्रिया की लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि सरकारी राशि के उपयोग और रिकॉर्ड संधारण की गंभीर प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बनता है।

बैठकों के नाश्ते पर भी लाखों खर्च?

मामले में शिक्षा विभाग की बैठकों के दौरान नाश्ते और अन्य खर्चों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी के अनुसार बैठकों में नाश्ते पर करीब 4 लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद यदि खरीदी गई सामग्री का स्पष्ट रिकॉर्ड, स्टॉक एंट्री और भौतिक सत्यापन उपलब्ध नहीं है, तो सरकारी धन के उपयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

कलेक्टर की जांच में सामने आए कई बिंदु

शिकायत मिलने के बाद बलरामपुर कलेक्टर द्वारा अपर कलेक्टर प्रमोद गुप्ता और जिला कोषालय अधिकारी दशरथ सोनी से जांच कराए जाने की बात सामने आई है। जांच में कथित तौर पर ऐसे कई भुगतान पाए गए, जिनसे संबंधित सामग्री कार्यालय अथवा भंडार में उपलब्ध नहीं मिली।

कुछ बिलों को टुकड़ों में बांटकर भुगतान किए जाने की बात भी जांच में सामने आने की जानकारी है।

हालांकि, स्कूल शिक्षा विभाग के 28 सितंबर 2026 के स्थानांतरण आदेश में मनीराम यादव को हटाने का कोई विस्तृत कारण दर्ज नहीं किया गया है। इसलिए तबादले को सीधे किसी अपराध या दोषसिद्धि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों पर अंतिम जिम्मेदारी संबंधित सक्षम जांच और विभागीय/कानूनी कार्रवाई के निष्कर्षों से ही तय होगी।

अब नए DEO के सामने बड़ी चुनौती

मनीराम यादव के स्थानांतरण के बाद नरेंद्र कुमार निरापुरे बलरामपुर-रामानुजगंज के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी संभालेंगे। अब नए DEO के सामने सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा विभाग के प्रशासनिक कामकाज को व्यवस्थित करने के साथ-साथ लंबित वित्तीय मामलों, खरीदी प्रक्रिया, स्टॉक रिकॉर्ड और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की होगी।

करोड़ों रुपये की खरीदी से जुड़े सवालों के बीच विभाग के इस बड़े फेरबदल ने शिक्षा महकमे में हलचल जरूर बढ़ा दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में सामने आए वित्तीय अनियमितताओं के बिंदुओं पर आगे विभागीय अथवा कानूनी कार्रवाई होती है या मामला केवल प्रशासनिक तबादले तक सीमित रह जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!